Skip to main content
बिल बनाना और भुगतान
- विद्युत की बिक्री सीईआरसी टैरिफ विनियमों के तंत्र के अंतर्गत थोक ग्राहकों और नीपको के बीच निष्पादित थोक बिजली आपूर्ति समझौतों (बीपीएसए)/बिजली खरीद समझौतों (पीपीए) द्वारा नियंत्रित होती है।
- पावर स्टेशनों से ग्राहकों को शेयर विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर आवंटित किए जाते हैं। बिजली स्टेशनों की घोषित क्षमताओं, आवंटित शेयरों, लाभार्थियों द्वारा मांग, सामूहिक लेनदेन और ओपन एक्सेस अनुमोदन के आधार पर एनईआरएलडीसी द्वारा दैनिक इंजेक्शन/आहरण निर्धारण किया जाता है।
- व्यापारिक ऊर्जा को ओपन एक्सेस ग्राहकों के साथ पावर एक्सचेंज प्लेटफॉर्म/द्विपक्षीय लेनदेन (एलटीए/एमटीओए/एसटीओए) पर सामूहिक लेनदेन के माध्यम से बेचा जाता है।
- एनईआरपीसी द्वारा जारी मासिक क्षेत्रीय ऊर्जा खातों (आरईए) में दर्शाए गए अनुसार लाभार्थियों को उपलब्ध कराई गई बिजली के लिए हर महीने बिल उपस्थापित किए जाते हैं। मासिक आरईएएस के द्विपक्षीय विनिमय विवरणों के आधार पर सहमत बिलिंग साईकल के अनुसार द्विपक्षीय लेनदेन के लिए बिल उपस्थापित किए जाते हैं।
- लाभार्थियों को बिक्री से प्राप्त आय की प्राप्ति, लागू सीईआरसी विनियमों, बीपीएसए/पीपीए के साथ-साथ भारत सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और संबंधित राज्य सरकारों के बीच त्रिपक्षीय समझौतों द्वारा नियंत्रित होती है। द्विपक्षीय लेनदेन के अंतर्गत आय की वसूली पार्टियों के साथ समझौतों के अनुसार की जाती है। सामूहिक लेनदेन से प्राप्त आय को लागू सीईआरसी विनियमों के प्रावधानों के अनुसार वसूल की जाती है।
- भुगतान प्राथमिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण/चेक के माध्यम से प्राप्त होते हैं। लाभार्थियों को भुगतान सुरक्षा तंत्र के रूप में नीपको के पक्ष में अपरिवर्तनीय और रेवोल्विंग लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) बनाए रखने की आवश्यकता होती है।
- सीईआरसी टैरिफ विनियमों और नीपको की छूट योजना के अनुसार समय पर भुगतान के लिए छूट दी जाती है। सीईआरसी टैरिफ विनियमों के प्रावधानों के अनुसार विलंबित भुगतान पर अधिभार लगाया जाता है।